बुधवार, 25 दिसंबर 2013

पी सी एस से आइ ए एस बनने के नियमों में बदलाव

भारतीय सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने राज्य सेवाओं से अखिल भारतीय सेवाओं में प्रोन्नति के लिये लागू वर्ततान नियमों में बदलाव कर दिया है

अब तक लागू नियमों के अंतरगत अखिल भारतीय सेवा में प्रोन्नति करने के लिये प्रान्तीय सेवा के अधिकारी की वरिष्ठता और वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट ए सी आर को आधार माना जाता था बशर्ते उसकी उम्र 54 वर्ष की हो यानी प्रोन्नति के उपरांत उसे अखिल भारतीय सेवा में न्यूनतम 6 वर्ष का कार्यकाल अवश्य मिले।
बदले हुये नियमों के अनुसार अब प्रोन्नति से पहले संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा और साक्षातकार से भी होकर गुजरना होगा। समूचे चयन का 30 प्रतिशत लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर 20 प्रतिशत साक्षातकार के आधार पर और शेष 50 प्रतिशत में वरिष्ठता और वार्षिक गोपनीय आख्या का समान आधार होगा।

भारत सरकार के कार्मिक मंत्रालय द्वारा लागू व्यवस्था का अर्थ यह होगा कि प्रान्तीय सिविल सेवा के पी सी एस अधिकारियों को अखिल भारतीय आइ ए ऐस सेवा में प्रोन्नत होने से पूर्व लिखित परीक्षा और साक्षातकार से गुजरना होगा।

उत्तर प्रदेश तमिलनाडु सहित अनेक राज्यों ने भारत सरकार के द्वारा प्रस्तावित इस व्यवस्था के विरोध में मत दिया था परन्तु केन्द्र सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम कुछ माह से पूर्व इस विवादित प्राविधान को लागू करने का निर्णय क्यों लिया यह अवश्य ही विचारणीय है।

सामान्यतः उत्तर प्रदेश में एक पी सी एस अधिकारी को प्रोन्नति के माध्यम से आइ ए एस बनने में पच्चीस से तीस वर्ष का समय लगता है।

अब सोचिये कि कैसा लगेगा जब जीवन के छठे दशक में जब किसी अधिकारी को अपने बच्चों के भविष्य के प्रति जागरूक और चिंतित होना चाहिये तब वह स्वयं संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी कर रहा होगा ?

जब एक बार कोई अधिकारी स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध कर चुका है तो सेवा के उत्तरार्ध में पुनः लिखित परीक्षा और साक्षातकार के तैयार करने का औतित्य कम से कम मेरी तो समझ में नहीं आता।

इस संबंध में आपकी क्या राय है दोस्तों ?

2 टिप्‍पणियां:

  1. बढिया नियम बना है वरना हुजूर की हाँ मेँ हाँ मिलाने वालोँ का ही प्रमोशन होता है। ये तो कहिए हर जिले मेँ कमीश्नरी नहीँ होती वरना जिले मेँ ही एसडीएम से डीएम और डीएम से कमीश्नर पेट चेले बन जाते।

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  2. बढिया नियम बना है वरना हुजूर की हाँ मेँ हाँ मिलाने वालोँ का ही प्रमोशन होता है। ये तो कहिए हर जिले मेँ कमीश्नरी नहीँ होती वरना जिले मेँ ही एसडीएम से डीएम और डीएम से कमीश्नर पेट चेले बन जाते।

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