ग्रामीण जीवन में सबसे निचले स्तर के इस राजस्व कर्मी लेखपाल की महत्ता का अंदाजा आप उपर लिखी कहावत से आसानी से लगा सकते है। अपने प्रदेश में राजस्व विभाग में कार्यरत सबसे निचले स्तर के राजस्व कर्मी लेखपाल के संबंध में उपर लिखी कहावत सामान्य रूप से कही और सुनी जाती रही है। सन् 1973 से पूर्व उत्तर प्रदेश में इस राजस्व कर्मी का नाम ‘पटवारी’ हुआ करता था। इस पदनाम की छबि आम जनता में अच्छी न होने के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह जी के द्वारा ऐतिहासिक निर्णय लेते हुये इस पदनाम के स्थान पर इसे ‘लेखपाल’ का पदनाम दिया गया था। देश के अनेक राज्यों में आज भी राजस्व विभाग की सबसे निचली पायदान पर विराजमान इस महत्वपूर्ण कर्मी को पटवारी ही कहा जाता है। राजस्थान राज्य में ऐसे राज्यों की श्रेणी में है जिसमें आज भी सबसे निचले स्तर के राजस्व कर्मी को इसी नाम ‘पटवारी’ से संबोधित किया जाता है। पटवारी पदनाम के संबंध में एक रोचक चर्चा तीसरा खंभा में की गयी है जिसे जानने के लिये आगामी लिंक को क्लिक करें।
तीसरा खंबा: राजस्थान में कृषिभूमि का नामान्तरण
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मंगलवार, 23 अगस्त 2011
मंगलवार, 9 अगस्त 2011
सुधार विलेख (Correction Deed) निष्पादित करने से मना करने पर विक्रेता के विरुद्ध विशिष्ठ अनुपालन का वाद
उत्तर प्रदेश में भू राजस्व की वसूली हेतु भूअभिलेखों को अद्यतन रखने हेतु जिलाधिकारी को उत्तरदायी बनाया गया है। इस हेतु भू राजस्व अधिनियम 1901 के प्रविधान प्रदेश में लागू है जिसकी धारा 34 भूअधिलेखों में नामान्तरण की ब्यवस्था देती है । इस धारा के तहत किसी भी प्रकार से भूमि पर कब्जे के परिवर्तन के लिये तहसीलदार द्वारा नामान्तरण वादों की सुनवयी के आधार पर नामान्तरण आदेश पारित किये जाते हैं । अनेक अवसरों पर बैनामें में त्रुटि होने से नामान्तरण आदेश जारी होने में अडचन आती है , ऐसी स्थिति में क्रेता सुधार विलेख निष्पादित कराता है जिसके संबंध में एक रोचक चर्चा तीसरा खंभा पर की गयी है । आप सभी सुधी पाठकों के लिये उसे यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ कृपया विस्तृत विवरण पढने के लिये लिंक पर क्लिक करें।
तीसरा खंबा: सुधार विलेख (Correction Deed) निष्पादित करने से मना करने पर विक्रेता के विरुद्ध विशिष्ठ अनुपालन का वाद
बुधवार, 3 अगस्त 2011
पति की मृत्यु पर उस की पैतृक संपत्ति में पत्नी को उत्तराधिकार प्राप्त होगा
उत्तर प्रदेश में लागू भूमि संबंधी जमींदारी विनाश अधिनियम 1950 में पति की मृत्यु पर मृतक की कृषि भूमि हेतु उसकी पत्नी को पुत्रों के साथ समान रूप से उत्तराधिकारिणी माना गया है । यहां पति की मृत्यु पर उसकी पत्नी को मिलने वाले संपत्ति के अधिकार के संबंध में एक रोचक चर्चा तीसरा खंभा पर की गयी है । आप सभी सुधी पाठकों के लिये उसे यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ कृपया विस्तृत विवरण पढने के लिये लिंक पर क्लिक करें।
तीसरा खंबा: पति की मृत्यु पर उस की पैतृक संपत्ति में पत्नी को उत्तराधिकार प्राप्त होगा
बुधवार, 6 जुलाई 2011
शुक्रवार, 1 जुलाई 2011
नायब तहसीलदार ने नामांतरण आदेश

केवलकृण question
एक मामले म एक पकार के प म नायब तहसीलदार ने नामांतरण आदेश जार कया, लेकनदूसरे प क आपय के बाद तहसीलदार ने यह कहते हुए रकाड यथावत रखने का आदेश दया क नायब तहसीलदार वभागीय परा उीण नहं थे। तहसीलदार ने पहले प के नामांतरण आवेदनक पुनः सुनवाई क और अंततः उसका आवेदन खारज हो गया। साथ ह उसे सलाह द क सतव क उोषणा के िलए वह िसवल कोट जा सकता है। पहले प ने एसडओ कोट म अपील क, लेकन वहां भीe उसक अपील खारज हो गई। साथ ह कोट ने िमयाद अिधिनयम के तहत दए गए उसके तक से भी असहमित य क। पहले प ने दूसर अपील अपर कलेटर के यायालय म क, वहां दूसर अपील वीकार करते हुए दोन िनन यायालय के आदेश को खारज कर दया गया। इधर दूसरे प ने अपर कलेटर के फैसले के खलाफ राजव मंडल म अपील क जहां मुकदमा जार है। इस पूरे मामले म पहले प का सव संदध है और वह अपने प म कोई उोषणा या टे ा नहं कर पाया है। वह दूसरे प के सव को वीकार करता है, उसे चुनौती नहं देता। बक दूसरे प के साथ अपना भी नामांतरण चाहता है। इस बीच दूसरा प, जसका सव प है, एक भूिम म फौती के िलए तहसीलदार के यायालय म आवेदन करता है। पहले प ने यायालय म तक दया है क इसी भूिम से संबंिधत वाद राजव मंडल म लंबत है, अतः दूसरे प का फौती आवेदन खारज कया जाना चाहए। दूसरे प का तक है क उसका सतव प है, और कोई टे भी नहं है, इसिलए फौती आवेदन का िनराकरण कया जाना चाहए। यह है क या तहसीलदार इन परिस◌्थय म फौती आवेदनका िनराकरण कर सकता है। या इसके िलए कोई याियक ांत है। Rep
"हद विध चचा समूह फौती नामांतरण" by राकेश शेखावत Rakesh शेखावत Shekh राकेश शेखावत Rakesh शेखावत Shekhawat Viewrofile More
केवल कृण जी, नमकार। वतुतः नामातकरण एक वय देयता तय करने कराजव या है। जो राय सरकार लगान वसूली के िलए अपनाती है। लेकन यह भी सच है क इसे मा वय एवं शासिनक मामला माना जाना भी ठक नहं है यक वतुतः अिधकार अिभलेख को आदनांक(चकंजम) करने का मूलभूत आधार यह होता है। चूँक आपके मामले म वव का वमान है जसके सबंध म शीष राजव यायालय म मामला लबत है ऐसे म मामले का अतम प से िनतारण होने तक, चाहे मामले म कसी कार का कोई टे ना हो, तहसीलदार महोदय ारा नामातकरण खोला जाना कसी भी कार से सुसंगत एवं संभव नहं लगता। अछा हो आप तीय पकार को सम यायालय म घोषणा का वाद तुत करने
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